मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

Bikana Khabar

बीकानेर की खबरें सबसे पहले

ताज़ा
• राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजेश्वर सिंह ने की निर्वाचन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की देखे वीडियो • शत-प्रतिशत मतदान के लिए युवा, दिव्यांग एवं वृद्ध मतदाताओं से किया संवाद देखे वीडियो • खुले नाले की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन देखे वीडियो • पंचायत राज आम चुनाव के दूसरे चरण का मतदान कल मतदान दल हुए रवाना देखें वीडियो • श्री देशवाली कुम्हार पंचायती धर्मशाला में अन्नक्षैत्र का हुआ शुभारंभ देखे वीडियो • राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजेश्वर सिंह ने की निर्वाचन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की देखे वीडियो • शत-प्रतिशत मतदान के लिए युवा, दिव्यांग एवं वृद्ध मतदाताओं से किया संवाद देखे वीडियो • खुले नाले की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन देखे वीडियो • पंचायत राज आम चुनाव के दूसरे चरण का मतदान कल मतदान दल हुए रवाना देखें वीडियो • श्री देशवाली कुम्हार पंचायती धर्मशाला में अन्नक्षैत्र का हुआ शुभारंभ देखे वीडियो
ad1

साइबर ठगी की नई पहली वारदात का पुलिस अधीक्षक ने किया खुलासा देखे वीडियो

Bikaner Jul 02, 2026 Super Admin 52
शेयर:
साइबर ठगी की नई पहली वारदात का पुलिस अधीक्षक ने किया खुलासा देखे वीडियो

पुलिस ने देशभर में सक्रिय साइबर ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने ऑनलाइन गोल्ड लोन सिस्टम को ठगी की रकम को वैध दिखाने का जरिया बना लिया था। पुलिस ने गिरोह के एक प्रमुख सदस्य सुनील ज्यानी (35) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने 56 ग्राम सोने पर छह बार गोल्ड लोन लेकर करीब 25 लाख रुपये का लेनदेन किया, जबकि यह राशि साइबर ठगी से जुटाई गई थी।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त स्विफ्ट कार और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि यह तरीका बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए अपनाया गया था और इस तरह के मामले में बीकानेर साइबर पुलिस की यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क ?
साइबर अपराधी पहले अलग-अलग राज्यों में लोगों को लालच देकर उनके नाम से वैध तरीके से गोल्ड लोन खाते खुलवाते थे। इसके लिए वास्तविक सोना गिरवी रखा जाता था और वित्तीय संस्था से बैंक खाते में लोन राशि प्राप्त कर ली जाती थी। इसके बाद साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे इन ऑनलाइन गोल्ड लोन खातों में जमा कर बकाया लोन का भुगतान (रिपेमेंट) कर दिया जाता था। लोन चुकते होते ही गिरवी रखा सोना वापस मिल जाता और यही प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाती थी। इस तकनीक से ठगी की रकम बैंकिंग प्रणाली में वैध लेनदेन जैसी दिखाई देने लगती थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की शिकायत मिलने पर जब तक बैंक संबंधित खातों को फ्रीज करते, उससे पहले ही आरोपी गोल्ड लोन का भुगतान कर चुके होते थे। इस कारण ठगी की राशि वैध बैंकिंग लेनदेन में बदल जाती थी और जांच एजेंसियों के लिए धन के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना काफी कठिन हो जाता था।
कई राज्यों की ठगी के मामलों से जुड़ा आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी के मामलों की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला कि उसने छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति से निवेश के नाम पर करीब 5 लाख रुपये की ठगी की थी। इसके अलावा एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगभग 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। इन मामलों में प्राप्त रकम का उपयोग गोल्ड लोन की अदायगी में किया गया

https://youtu.be/qTuQVd4ZsRg

हमसे जुड़ें

शेयर करें:

संबंधित ख़बरें