बुधवार, 29 जुलाई 2026

Bikana Khabar

बीकानेर की खबरें सबसे पहले

ताज़ा
• 100 से अधिक नर्सिंग विद्यार्थियों की महा सेना ने किया मच्छरों के लार्वा का नाश देखे वीडियो • राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में औषधीय पौधों का हुआ रोपण देखे वीडियो • ATS इनपुट पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्र में जासूसी के आरोप में युवक को किया गिरफ्तार देखें वीडियो • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोदारा ने की जन सुनवाई,अधिकांश परिवेदनाओं का मौके पर ही किया निस्तारण देखे वीडियो • रेंज आई जी ओमप्रकाश ने की प्रेस वार्ता अपराधों के छ महीने के डेटा किए शेयर देखे वीडियो • 100 से अधिक नर्सिंग विद्यार्थियों की महा सेना ने किया मच्छरों के लार्वा का नाश देखे वीडियो • राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में औषधीय पौधों का हुआ रोपण देखे वीडियो • ATS इनपुट पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्र में जासूसी के आरोप में युवक को किया गिरफ्तार देखें वीडियो • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोदारा ने की जन सुनवाई,अधिकांश परिवेदनाओं का मौके पर ही किया निस्तारण देखे वीडियो • रेंज आई जी ओमप्रकाश ने की प्रेस वार्ता अपराधों के छ महीने के डेटा किए शेयर देखे वीडियो

साइबर ठगी की नई पहली वारदात का पुलिस अधीक्षक ने किया खुलासा देखे वीडियो

Bikaner Jul 02, 2026 Super Admin 42
शेयर:
साइबर ठगी की नई पहली वारदात का पुलिस अधीक्षक ने किया खुलासा देखे वीडियो

पुलिस ने देशभर में सक्रिय साइबर ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने ऑनलाइन गोल्ड लोन सिस्टम को ठगी की रकम को वैध दिखाने का जरिया बना लिया था। पुलिस ने गिरोह के एक प्रमुख सदस्य सुनील ज्यानी (35) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने 56 ग्राम सोने पर छह बार गोल्ड लोन लेकर करीब 25 लाख रुपये का लेनदेन किया, जबकि यह राशि साइबर ठगी से जुटाई गई थी।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त स्विफ्ट कार और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि यह तरीका बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए अपनाया गया था और इस तरह के मामले में बीकानेर साइबर पुलिस की यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क ?
साइबर अपराधी पहले अलग-अलग राज्यों में लोगों को लालच देकर उनके नाम से वैध तरीके से गोल्ड लोन खाते खुलवाते थे। इसके लिए वास्तविक सोना गिरवी रखा जाता था और वित्तीय संस्था से बैंक खाते में लोन राशि प्राप्त कर ली जाती थी। इसके बाद साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे इन ऑनलाइन गोल्ड लोन खातों में जमा कर बकाया लोन का भुगतान (रिपेमेंट) कर दिया जाता था। लोन चुकते होते ही गिरवी रखा सोना वापस मिल जाता और यही प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाती थी। इस तकनीक से ठगी की रकम बैंकिंग प्रणाली में वैध लेनदेन जैसी दिखाई देने लगती थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की शिकायत मिलने पर जब तक बैंक संबंधित खातों को फ्रीज करते, उससे पहले ही आरोपी गोल्ड लोन का भुगतान कर चुके होते थे। इस कारण ठगी की राशि वैध बैंकिंग लेनदेन में बदल जाती थी और जांच एजेंसियों के लिए धन के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना काफी कठिन हो जाता था।
कई राज्यों की ठगी के मामलों से जुड़ा आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी के मामलों की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला कि उसने छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति से निवेश के नाम पर करीब 5 लाख रुपये की ठगी की थी। इसके अलावा एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगभग 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। इन मामलों में प्राप्त रकम का उपयोग गोल्ड लोन की अदायगी में किया गया

https://youtu.be/qTuQVd4ZsRg

हमसे जुड़ें

शेयर करें:

संबंधित ख़बरें