टीईटी विवाद पर लामबंद हुए शिक्षक कलेक्ट्रेट के आगे निकाली रैली देखें वीडियो
नौकरी पर मंडराया संकट तो जागा शिक्षक,टीईटी विवाद पर मांगा समाधान
बीकानेर। नौकरी पर संकट मंडराते ही शिक्षक संगठन जाग उठे है और टीईटी विवाद पर केन्द्र सरकार से समाधान की गुहार लगाते हुए गुरूवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की अगुवाई में जिला कलक्टर कार्यालय के सामने धरना दिया। इस दौरान उपस्थित शिक्षकों ने 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर चिंता व्यक्त की है। महासंघ के ओमप्रकाश ने इसे अव्यावहारिक,दुर्भाग्यपूर्ण तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से इस तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट प्रदान की थी और उन्हें बिना टेट के सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के 1 मई 2025 और 29 मई 2026 के फैसलों में 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टेट को अनिवार्य कर दिया गया है। महासंघ के प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थी, इसलिए बाद के प्रावधानों को पूर्व प्रभाव से लागू करना उचित नहीं है। आचार्य ने कहा कि जो शिक्षक रिटायर होने के करीब पहुंच गए हैं उनसे टीईटी की परीक्षा देने को कहना कहीं से भी उचित नहीं है। राज्य सरकार के पहल के बाद शिक्षकों को अनुभव के आधार पर कुछ छूट दी जानी चाहिए।
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