छह वर्षीय हितेश की अनूठी शिव भक्ति:कोलायत से कांवड़ लेकर पहुंचा बीकानेर देखें वीडियो
छह वर्षीय हितेश की अनूठी शिव भक्ति: कोलायत से बीकानेर तक की कठिन कांवड़ यात्रा
बीकानेर श्रावण मास के इस पवित्र महीने में, जहां चारों ओर शिव भक्तों की गूंज है, वहीं बीकानेर में एक छह वर्षीय बच्चे ने अपनी अटूट आस्था और शिव भक्ति से सभी को अचंभित कर दिया है। नन्हें हितेश खेमाणी ने कोलायत से बीकानेर तक की लगभग 52 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा पैदल पूरी कर, भक्ति की एक अनूठी और प्रेरणादायी मिसाल पेश की है।
श्रावण मास की विशेषता को ध्यान में रखते हुए, 13 शिव श्रद्धालुओं का एक दल 15 अगस्त को कोलायत से पवित्र जल लेकर बीकानेर के लिए रवाना हुआ था। इस दल में सबसे छोटा और सबसे उत्साही सदस्य हितेश था, जिसने अपनी उम्र की परवाह किए बिना, इस लंबी और थकाऊ यात्रा का हिस्सा बनने का फैसला किया। उसकी आंखों में भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास और उत्साह साफ झलक रहा था।
पैदल यात्रा के दौरान, हितेश ने अन्य श्रद्धालुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए, शिव के जयकारों के बीच अपनी कांवड़ को संभाला। रास्ते में आने वाली कठिनाइयों और थकान को भुलाकर, वह केवल अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहा। उसके इस अटूट हौसले ने अन्य श्रद्धालुओं को भी प्रेरित किया।
17 अगस्त की सुबह, यह दल द्वारकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचा, जहां हितेश और अन्य श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक किया। इस अवसर पर मंदिर में माहौल अत्यंत भक्तिमय और भावनात्मक हो गया। हितेश की इस असाधारण यात्रा की सभी ने प्रशंसा की और उसे शिव भक्ति का सच्चा उदाहरण बताया।
फड़ बाजार स्थित श्री दरियावदेव टेम्पल ट्रस्ट के अंतर्गत द्वारकेश्वर महादेव मंदिर में वर्ष 2009 से श्रावण मास में हवन एवं भगवान शिव का अभिषेक नियमित रूप से किया जा रहा है। इस धार्मिक परंपरा के तहत, यह कांवड़ यात्रा आयोजित की गई थी, जिसमें हितेश की भागीदारी ने इसे और भी विशेष बना दिया।
यात्रा के दौरान, पवन मोदी, नितिन बजाज और अजय खत्री जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने श्रद्धालुओं की सेवा एवं सहयोग प्रदान किया। उन्होंने हितेश की दृढ़ता और भक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसकी यह यात्रा सभी के लिए एक प्रेरणा है।
छह वर्षीय हितेश की यह कांवड़ यात्रा न केवल उसकी श्रद्धा और संकल्प को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास किसी भी आयु में संभव है। उसकी यह यात्रा बीकानेर और उसके आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। हितेश ने अपनी छोटी सी उम्र में जो कर दिखाया है, वह वास्तव में सराहनीय और प्रेरणादायी है।
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