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पीबीएम अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला समाज व परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर मोर्चरी के आगे लगाया धरना देखें वीडियो

Bikaner Jul 15, 2026 Super Admin 191
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पीबीएम अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला समाज व परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर मोर्चरी के आगे लगाया धरना देखें वीडियो

कमला को न्याय नहीं मिलने तक शव उठाने से इंकार
बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद भर्ती एक और प्रसूता की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने मोर्चरी के बाहर धरना लगा दिया है और चेतावनी दी है कि जब तक कमला को न्याय नहीं मिलेगा। धरना नहीं उठाया जाएगा। युवा नेता रामनिवास कूकणा की अगुवाई मेंं दिए गये इस धरने पर पीडि़तों की मांग है कि दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के साथ साथ सक्षम मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम किया जाएं। साथ ही कमला के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएं। मृतका के पति ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी और पुलिस शव जबरन ले गई। पति मेघराज ने बताया कि कमला करीब एक महीने से आईसीयू में भर्ती थी। करीब 15 दिन पहले उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था और पांच दिन पहले आईसीयू में ही ट्रेकियोस्टोमी की गई थी। मंगलवार को उसके गले से काफी खून बह रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे पैकिंग खोलने की बात कहकर उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। करीब एक घंटे बाद वापस आईसीयू लाया गया और शाम करीब सवा चार बजे मौत की सूचना दी गई। उनका आरोप है कि डॉक्टरों ने यह भी नहीं बताया कि कमला को ऑपरेशन थिएटर क्यों ले जाया गया था। कमला की मौत की खबर मिलते ही परिजन गुस्से में आ गए और अस्पताल में हंगामा हो गया। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को मॉर्चरी में शिफ्ट कराया। पति मेघराज का आरोप है कि इलाज में लापरवाही हुई और पुलिस शव जबरन ले गई। उन्हें अंतिम बार शव देखने तक नहीं दिया गया। घटना के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। मॉर्चरी के बाहर पुलिस तैनात की गई।वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला पहले से टाइप-1 डायबिटीज (शुगर की गंभीर बीमारी) से पीडि़त थी और उसे बचाने के लिए एम्स के डॉक्टरों से भी लगातार सलाह लेकर इलाज किया जा रहा था।
 मरीज पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी
पीबीएम अधीक्षक डॉ बी सी घीया ने बताया कि कमला को टाइप-1 डायबिटीज थी और वह समय पर इंसुलिन भी नहीं ले रही थी। डिलीवरी के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन में चली गई। बेहतर इलाज के लिए एम्स के डॉक्टरों से भी लगातार सलाह ली गई, लेकिन मंगलवार को कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट आने से उसकी मौत हो गई।

एक महीने में चौथी प्रसूता की मौत
पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल और मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन से एक महीने में यह चौथी प्रसूता की मौत है। इससे पहले 19 जून को प्रीति,21 जून को शारदा और 6 जुलाई को लीला देवी की मौत हो चुकी है। प्रसव के बाद ऐसी हालत में सात प्रसूताओं को भर्ती किया गया था। इनमें से तारा, राहिला और इमरती इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुकी हैं। कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा ने भी अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता और लापरवाही का आरोप लगाया है।

प्रदेश में अब तक 23 प्रसूताओं की मौत
सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण से यह प्रदेश की 23वीं प्रसूता की मौत है। इससे पहले कोटा, बीकानेर, जोधपुर, बांसवाड़ा और भीलवाड़ा में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं के बाद ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण की आशंका जताई गई है। इसे रोकने के लिए सरकार ने सभी अस्पतालों को एसओपी का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

https://youtu.be/NebycmccHws

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