आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत कार्यशाला हुई आयोजित देखें वीडियो
*आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत कार्यशाला आयोजित*
*एएनएम एवं नर्सिंग विद्यार्थियों को आयोडीन के महत्व, कमी से होने वाले रोगों और बचाव के उपायों की दी जानकारी*
बीकानेर, 26 अक्टूबर। विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस 21 अक्टूबर के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत सोमवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों की एएनएम तथा नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
*आयोडीन की कमी से हो सकते हैं गंभीर स्वास्थ्य विकार*
डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ. लोकेश गुप्ता ने बताया कि आयोडीन शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। शरीर को इसकी आवश्यकता कम मात्रा में होती है, लेकिन यह थायरॉइड हार्मोन के निर्माण, शारीरिक विकास तथा मस्तिष्क के सामान्य विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो सकता है। गर्भावस्था एवं बचपन में इसकी कमी से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने आमजन को पर्याप्त आयोडीन की पूर्ति के लिए नियमित रूप से आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करने की सलाह दी।
एपिडेमियोलॉजिस्ट नीलम प्रताप सिंह राठौड़ ने आयोडीन अल्पता विकारों की पहचान, उनसे बचाव तथा समय पर उपचार के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका समुदाय में आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। एएनएम एवं नर्सिंग विद्यार्थियों को आमजन तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
*नमक में आयोडीन की जांच का किया प्रदर्शन*
सनियर लैब टेक्नीशियन इदरिश जोइया ने नमक में आयोडीन की उपस्थिति की जांच करने की विधि का प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को नमक की जांच के तरीके की जानकारी देते हुए आयोडीन युक्त नमक के उपयोग के महत्व से अवगत कराया।
कार्यशाला में नर्सिंग अधिकारी विजय सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।
हमसे जुड़ें



