पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बीकानेर दौरे पर मीडिया से रूबरू होते हुए केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला देखें वीडियो
बीकानेर।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई एवं केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।गहलोत ने नाल में मीडिया से बातचीत में कहा,देश में परिस्थितियां बेहद गंभीर हो गई हैं। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को रविवार को सुनवाई करनी पड़ रही है। दिल्ली में जैसे बैरिकेडिंग की गई है एवं प्रदर्शन करने पहुंच रहे लोगों को रोका जा रहा है और नेताओं की गिरफ्तारियां हो रही हैं,वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।सरकार आखिर किस बात से इतनी घबराई हुई है कि देशभर से अपनी बात रखने आ रहे लोगों को रोकने को ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं?भाजपा के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।गहलोत ने इस घटना को राजस्थान में कानून-व्यवस्था के चरमराने का सबूत बताया और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में पूर्व विधायक की हत्या हो गई।उन्होंने आरोप लगाया कि जब एक पूर्व विधायक को दिनदहाड़े 70-80 लोग घेरकर मार सकते हैं,तो इस शासन में आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे है।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि खबरों के अनुसार,अतर सिंह भड़ाना से जुड़ा विवाद करीब दो साल से चल रहा था।उन्होंने सवाल किया कि इतने लंबे समय तक पुलिस और प्रशासन क्या कर रहे थे? जब खतरे की चेतावनी साफ थी,तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?गहलोत ने इस हत्या को पुलिस-प्रशासन की नाकामी का नतीजा बताया।उन्होंने कहा कि जिस सरकार में उसके अपने पूर्व विधायक सुरक्षित नहीं हैं,वह जनता को सुरक्षा का भरोसा कैसे दे सकती है?
पंचायती राज चुनाव और पुलिस का दुरुपयोग
गहलोत ने कहा कि जिस तरह भाजपा सरकार ने सरकारी तंत्र के साथ मिलकर निकाय चुनाव में जनादेश का अपमान कर बोर्ड बनाएं है।वैसा पंचायती राज चुनाव में भी कर सकती है।गहलोत ने पंचायती राज चुनाव चार चरणों में (22 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक) कराने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।उन्होंने आशंका जताई है कि यह लंबी प्रक्रिया पंचायत समिति और जिला परिषद के चुने हुए सदस्यों की कथित तौर पर खरीद-फरोख्त या अपहरण का अवसर देने के लिए एक साजिश हो सकती है।
प्रदर्शन करने वाले इसी देश के नागरिक
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग इसी देश के नागरिक हैं,कोई बाहर से नहीं आए हैं।इसके बावजूद उनसे दुर्व्यवहार किया जा रहा है। दिल्ली में जिस तरह की परिस्थितियां पैदा की गई हैं,उससे लग रहा है जैसे क्रेकडाउन किया जा रहा हो। दिल्ली में सरक ार ने आतंक मचा रखा है। मीडिया से लेकर आम लोगों तक में यही चर्चा है कि आखिर इस तरह की कार्रवाई करने की जरूरत क्या थी?
लोकतंत्र की बुनियाद में असहमति का सम्मान
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद में असहमति का सम्मान करना है।विपक्ष को सम्मान मिलना चाहिए,लेकिन आज जैसे विपक्षी नेताओं से व्यवहार किया जा रहा है,वह अनुचित है।राहुल गांधी,मल्लिकार्जुन खडग़े और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।पहली बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।विपक्ष के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और आपत्तियों का समाधान का प्रयास करना चाहिए।
न्यायपालिका में भी सुनवाई नहीं
पूर्व सीएम ने न्यायपालिका में सुनवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया और कहा वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल समेत कई वकील अपनी बात रख रहे हैं कि वे अदालतों के चक्कर लगाते-लगाते थक गए हैं,लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।देश में ऐसी स्थितियां बन रही हैं कि वकीलों को न्यायपालिका में सुनवाई नहीं होने की शिकायत करनी पड़ रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है।आने वाले समय में इसके क्या परिणाम होंगे,इसकी कल्पना मुश्किल है। देश किस दिशा में जा रहा है,इस पर हर नागरिक को विचार करना चाहिए।
दिल्ली में बैरिकेडिंग और गिरफ्तारियों पर सवाल
गहलोत ने कहा कि देशभर से लोग प्रदर्शन करने दिल्ली पहुंच रहे हैं। सरकार उन्हें रोकने को बैरिकेडिंग लगा रही है। लोगों को एकत्र होने से रोक रही है।जहां वे जुटते हैं,वहीं प्रदर्शन का केंद्र बन जाता है।बसें और ट्रेनें बंद करने या लोगों को रोकने से उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती।विभिन्न राज्यों से लोग लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं। सरकार को समझना चाहिए कि लोग अपनी बात रखने आ रहे हैं।उनके साथ दुर्व्यवहार और तितर-बितर करने के बजाय समस्याओं को सुनना चाहिए।
वोट चोरी पर विपक्ष की आपत्तियों का जवाब दें सरकार
गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़-दो साल से वोट चोरी को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं,लेकिन सरकार और चुनाव आयोग विपक्ष की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं कर पाया.पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठे है।चुनाव प्रक्रिया को लेकर ऐसी चिंताएं सामने आ रही हैं तो सरकार को इनका जवाब देना चाहिए.सरकार को लगता है कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गलतफहमी में है तो उसे विपक्ष से बात करनी चाहिए.सरकार को विपक्ष को समझाने और शंकाओं का समाधान का प्रयास करना चाहिए। लोकतंत्र में संवाद से रास्ता निकलता है,टकराव से नहीं।
विपक्ष दुश्मन नहीं
गहलोत ने कहा कि सरकार को समझना होगा कि विपक्ष कोई दुश्मन नहीं है,बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।विपक्ष की बातों को अनसुना करना और उसके नेताओं से अनुचित व्यवहार देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है।गहलोत ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं। देशवासियों को लोकतंत्र की अहमियत समझनी होगी और नई पीढ़ी को भी इसके प्रति जागरूक करना होगा।उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार का राजनीतिक ग्राफ नीचे आ चुका है।अगली बार उसकी सरकार नहीं बनेगी।हालांकि, उससे पहले देश में किस तरह की परिस्थितियां बनेंगी,यह कहना मुश्किल है।
जेएनजी जागी तो सीएम को पड़ेगा भागना
छात्र संघ चुनाव नहीं होने को लेकर पूछे गये प्रश्न का जबाब देते हुुए गहलोत ने कहा कि युवा शक्ति अब जागृत्त हो चुकी है। दिल्ली में हो रहा आन्दोलन इसका परिणाम है। अगर राजस्थान सरकार भी छात्र संघ चुनाव को लेकर टाल मटोल करेगी तो यहां युवा आन्दोलन को उतारू हो जाएंगे और सीएम भजन लाल को भागना पड़ेगा।
हमसे जुड़ें



